हिंदी भाषी संगठन

कला एवं सांस्कृतिक धरोहर मंत्रालय के तत्वावधान में

अपनों से अपनी बातें
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हमारे बारे में

The Hindi Speaking Union was established under the Hindi Speaking Union Act No. 33 of 1994 and it operates under the aegis of Ministry of Arts and Cultural Heritage.

The first Patron of HSU is His Excellency Sir Rabindrah Ghurburrun, G.O.S.K, Q.C Vice President of the Republic of Mauritius

प्रधान जी का संदेश

president2025

नमस्कार,

हिंदी स्पीकिंग यूनियन की वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत है ।

हिन्दी स्पीकिंग यूनियन की प्रधान के रूप में मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे इस महत्वपूर्ण संस्था का नेतृत्व करने का अवसर मिला है जो न केवल हिन्दी भाषा के प्रचार – प्रसार के लिए कार्य करती है बल्कि संस्कृति, साहित्य और मूल्यों को जीवित रखने का कार्य भी करती है ।

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत,सोच,भावनाओं और पहचान की अभिव्यक्ति है । यह वह सेतु है, जो हमें हमारे इतिहास, परंपराओं और भविष्य से जोड़ता है । एक ऐसी भाषा जिसने गिरमिटिया इतिहास में संघर्ष के दिनों में भी हमारी जड़ों को संजोए रखा और आज भी हमारी आत्मा को शब्द देती है ।

हिंदी स्पीकिंग यूनियन का उद्देश्य न केवल हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है बल्कि युवाओं, छात्रों, लेखकों, कलाकारों और आम जनता को इससे गहराई से जोड़ना भी है । प्रधान के रूप में मेरी यह प्राथमिकता होगी कि यूनियन की गतिविधियाँ नवाचार, समावेशिता और उत्साह से भरी हों ताकि हर वर्ग के लोग इसमें भागीदारी महसूस करें ।

हमारी भावी योजनाओं में विभिन्न प्रतियोगिताएँ, कार्यशालाएँ, पठन-पाठन शिविर, थिएटर व फिल्म प्रदर्शन, लेखन मंच, ऑनलाइन अभियान और शोध व प्रकाशन शामिल हैं । इन गतिविधियों के माध्यम से यही आशा है कि मॉरीशसवासी न केवल एक विषय के रूप में बल्कि अपनी पहचान के एक अभिन्न अंग के रूप में हिन्दी को अपनाएँ ।

मैं समस्त हिन्दी समुदाय, संस्थाओं और विशेषकर युवाओं से आग्रह करती हूँ कि वे आगे आएँ, संगठन से जुड़ें और इस सांस्कृतिक आंदोलन को और भी समृद्ध बनाएँ ।

हिन्दी हमारा गौरव है  और इसका प्रचार- प्रसार करना हमारा कर्तव्य है ।

सादर,
डॉ अंजलि चिंतामणि
प्रधान, हिन्दी स्पीकिंग यूनियन

पुस्तकालय

The library of Hindi Speaking Union is situated at Port Louis. It comprises of more than 300 books that ranges different topics. A study room is available at the seat of HSU where the public can read Hindi books

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